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अमर रिपब्लिक रीवा। देश को क्षय रोग से पूर्णरूपेण मुक्ति प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर क्षय रोग के उन्मूलन का कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके लिए केन्द्र एवं प्रदेश सरकारों के द्वारा देश एवं प्रदेश स्तर पर कई अलग-अलग प्राइवेट संस्थाओं और NGO को एक कांट्रेक्ट के तहत टी०बी० रोगियो की पहचान करने और उनका उपचार करने का दायित्व सौंपा गया।

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जिसमें मध्यप्रदेश में एक सोसल डेवलपर संस्था दिव्य ज्योति को टी०बी० रोगियो की पहचान करने और उनका नियमित उपचार करने का यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया जिसमें संस्था के उदासीन रवैए और कर्मचारियों को नियमित वेतन भुगतान न करने से क्षयरोग उन्मूलन का यह कार्यक्रम फ्लाप होता दिख रहा है।

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आपको बता दें कि संस्था स्तर पर क्षय रोग उन्मूलन के कार्यक्रम में लगे कर्मचारियों को नियमित भुगतान न होने एवं उनकी सुनवाई न होने के कारण यह प्रोग्राम फेल होता हुआ दिख रहा है संस्था में कार्य कर रहे कर्मचारी जब वेतन भुगतान की बात करते हैं तों संस्था में पदस्थ अधिकारियों के द्वारा उनको नौकरी से बाहर निकालने की बात कहकर कर्मचारियों की आवाज को दवा दिया जाता है।

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ऐसा ही ताजा मामला मध्यप्रदेश के रीवा जिले से आया है जहां दिव्य ज्योति सोसल डेवलपमेंट संस्था में भारत को टी०बी० रोग से मुक्ति दिलाने के लिए ज़मीनी स्तर पर कार्य कर रहे कर्मचारी का लगातार शोषण किया जा रहा है संस्था में कार्यरत कर्मचारियों को नियमित रूप से भुगतान नहीं किया जा रहा है,

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संस्था में मऊगंज में JSS के पद पर कार्य कर रहे शिवम मिश्रा के साथ भी ऐसा ही हुआ पीड़ित शिवम मिश्रा ने बताया कि वह अपनी जान जोखिम में डालकर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के अप्रैल 2022 से लगातार संस्था के साथ कार्य कर रहे हैं और टी०बी० रोगियो की पहचान कर उनका उपचार करवा रहे हैं जिसपर मुझे एवं संस्था में कार्य कर रहे अन्य कर्मचारी को नियमित रूप से भुगतान नहीं किया गया

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एवं 5-6 माह में एक माह का वेतन देकर चुप करा दिया जाता था और विरोध करने पर नौकरी से बाहर निकालने की धमकी दी जाती थी और बिल न पास होने की बात कही जाती थी वहीं पीड़ित शिवम मिश्रा ने बताया कि पिछले 10 महीने से संस्था के द्वारा मुझे किसी प्रकार सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराया गया जिसमें मुझे न तो मास्क दिया गया और न ही सेनेटाइजर और न ही हाथों के दस्ताने और हमलोगों को संस्था के द्वारा न तो किसी प्रकार का सुरक्षा बीमा दिया गया।

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पीड़ित शिवम ने बताया कि अप्रैल 2022 से दिसम्बर 2022 तक पैसा संस्था के द्वारा हमलोगों के खाते में पूरा भुगतान डायरेक्ट भेजा जाता था लेकिन जनवरी 2023 से यह पैसा टीम लीडर राजीव नारायण शुक्ला के खाते में भेजा जाने लगा जहां से टीम लीडर राजीव नारायण शुक्ला के द्वारा हमलोगों के वेतन में सेंध लगाकर वेतन फ़ोन-पे के माध्यम से दी जाने लगी जिसका विरोध मैंने संस्था प्रमुख से की जिसपर टीम लीडर राजीव नारायण शुक्ला के द्वारा बिना किसी कारण और नोटिस के मुझे संस्था से बाहर कर दिया गया।

वहीं पीड़ित शिवम मिश्रा ने बताया कि जिसपर मैंने अपने बकाया भुगतान के लिए श्रम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है एवं मामले की शिक़ायत कलेक्टर कार्यालय रीवा CMHO कार्यालय रीवा में की है जिसपर पूरा मामला माननीय कलेक्टर महोदय एवं मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी के संज्ञान में आ सके एवं मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जा सके।

आपको बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब दिव्य ज्योति संस्था में कार्यरत किसी कर्मचारी ने अपने श्रम भुगतान के लिए श्रम न्यायालय की शरण ली हो ऐसे ही कई अन्य मामले और भी सामने आ चुके हैं जिसपर राज्य क्षय अधिकारी वर्षा राय ने पूरे मामले को अपने संज्ञान में लिया था और संस्था को चेताया था कि इसकी पुनरावृत्ति न हो अन्यथा संस्था के साथ किया गया अनुबंध समाप्त कर दिया जाएगा।

वहीं टीम लीडर राजीव नारायण शुक्ला की तानाशाही रवैए और नियमित भुगतान न होने से परेशान होकर संस्था में कार्यरत पब्लिक D.C अखिलेश तिवारी भी श्रम न्यायालय के शरण में पहुंच गए हैं और मामले की शिक़ायत प्रशासनिक अधिकारियों से करते हुए आवाज़ उठाने के लिए मीडिया के पास पहुंच गए और न्याय की मांग करते हुए प्रशासनिक जांच किए जाने की मांग की है।

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वहीं कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान में टीम लीडर राजीव नारायण शुक्ला के द्वारा हर माह लाखों रुपए का घोटाला किया जा रहा है वहीं नौकरी खो जाने के डर से संस्था में कार्य कर रहे अन्य कर्मचारी खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं।

साथ ही कर्मचारियों ने बताया कि टीम लीडर राजीव नारायण शुक्ला जिले में कार्य कर रहे सभी 24 कर्मचारियों का हर माह का पूरा वेतन संस्था से प्राप्त कर रहे हैं एवं कर्मचारियों के खाते में आधे-अधूरे वेतन का भुगतान कर रहे हैं एवं शिक़ायत करने पर नौकरी से बाहर निकालने की धमकी देकर कर्मचारियों की आवाज को दबा रहे हैं अब देखना यह होगा कि क्या ख़बर का प्रकाशन होने के बाद सक्षम अधिकारी मामले को गंभीरता से लेकर कोई कार्रवाई करते हैं या फिर नहीं।

इस मामले का पूरा खुलाशा अगले अंक में देखें अमर रिपब्लिक न्यूज़ चैनल पर।

राजीव द्विवेदी

अमर रिपब्लिक 


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