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रीवा/सिरमौर
प्रशासन भले ही समय-समय पर शासकीय भूमियों को भू माफियाओं एवं अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराने का अभियान चलाया जा कर यह दावे करता है कि अपराधियों के चंगुल से करोड़ों की बेशकीमती जमीन को मुक्त कराया गया।

लेकिन वही यदि हम बात नगर परिषद सिरमौर की करें तो ठीक इसके विपरीत देखेंगे आज भी यहां बेशकीमती अरबों की जमीन पर अतिक्रमणकारियों और भू माफियाओं का कब्जा है  पर सवाल वही की इनको संरक्षण किसका है कि प्रशासन की कार्यवाही यहां आते आते दम तोड़ देती है या यूं कहें कि अतिक्रमणकारियों के आगे प्रशासन नतमस्तक है।

सिरमौर डभौरा रोड में शासकीय बेशकीमती जमीन पर भू माफियाओं ने राजनैतिक आकाओं के दम पर अवैध निर्माण कर आलीशान मकानों को बनाकर अनैतिक व्यापार का संचालन किया जा रहा है।

वही सिरमौर- क्योंटी रोड ने अतिक्रमणकारियों ने मनमाने ढंग से अतिक्रमण कर आलीशान मकानों दुकानों का निर्माण किया है । हाल ही में प्रशासन द्वारा 376 के आरोपियों के मकानों पर बुलडोजर चलाने की कार्यवाही कर कुछ अंश को जमींदोज किया है । लेकिन उसके बाद पुनः अतिक्रमणकारियों ने जमीन पर कब्जा कर मकान का निर्माण करा दिया।

सिरमौर में यदि प्रशासन संजीदगी से कार्रवाई करें तो देखेंगे कि सिरमौर-डभौरा रोड, सिरमौर- क्योटी मार्ग , सिरमौर न्यायालय मार्ग, सिरमौर- चचाई रोड , बाजार एरिया , तहसील परिसर , जय स्तंभ चौराहा से रीवा रोड, थाना सिरमौर के सामने में करोड़ों की बेशकीमती भूमियों पर अतिक्रमणकारियों और भू माफियाओं ने कब्जा कर मकान और दुकान का निर्माण करा या तो बेच दिया या किराए पर दिया है।

न्यायालय मार्ग सिरमौर में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर्ता के विरुद्ध माननीय न्यायालय द्वारा निर्णय पारित होने के बावजूद भी स्थल को खाली नहीं कराया जा सका । जिस संबंध में अधिवक्ता संघ सिरमौर द्वारा पत्राचार कर अतिक्रमण हटाने का अनुरोध किया गया । जिस पर नोटिस तक ही कार्यवाही सीमित रही । जिससे न केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं बल्कि अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

प्रशासनिक कार्यवाही नोटिस तक सीमित

सिरमौर में अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध प्रशासन पर अतिक्रमणकारी किस कदर हावी हैं शायद किसी से छुपा नहीं है यदि हम बात करवा ही की करें तो प्रशासन की कार्रवाई महज नोटिस तक ही सीमित है फिर चाहे कार्यवाही राजस्व विभाग की हो या नगरी प्रशासन की दोनों में कोई असमानता नहीं है।

प्रशासन अनभिज्ञ है ऐसा नहीं है क्योंकि समय समय पर प्रशासन द्वारा अतिक्रमणकारियों को नोटिस तो भेजी जाती है लेकिन नोटिस के बाद प्रशासन या तो भूल जाता है या उसके हाथ बांध दिए जाते हैं कि प्रशासन कार्यवाही करना भूल जाता है परिणाम स्वरूप अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।

नगर सिरमौर में अतिक्रमणकारियों की एक लंबी लिस्ट है जिनको समय-समय पर नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया । वहीं राजस्व विभाग द्वारा भी समय-समय पर अनेकों अतिक्रमणकारियों को नोटिस तो दी गई लेकिन कार्यवाही ढाक के तीन पात रही । यदि हम देखें तो राजस्व विभाग के अनुभाग के मुखिया के कार्यालय के सामने गेट पर अतिक्रमण है।

तहसील कार्यालय परिसर में अतिक्रमणकारियों का बेजा कब्जा है जिसे आज तक स्वयं राजस्व प्रशासन खाली नहीं करा पाया तो दूसरे की अपेक्षा क्या की जा सकती है ।

वही नगरीय प्रशासन के द्वारा स्वयं का शौचालय व स्टोर रूम भी अतिक्रमणकारियों की चपेट में है जिसे आज तक खाली नहीं कराया जा सका । थाना के सामने अतिक्रमण है पुलिस दूसरे की राह देख रही की कोई आकर अतिक्रमण हटा दे।

यात्री प्रतीक्षालय और बस स्टॉप में भी अतिक्रमणकारियों का कब्जा

नगर सिरमौर में विधायक मद से रीवा रोड एवम डभौरा रोड में निर्मित यात्री प्रतीक्षालय और एनएच 135b रीवा रोड में स्थापित बस स्टॉप में भी अतिक्रमणकारियों ने बेजा कब्जा कर लिया है । जिसमें जानवर को बांधने और गाड़ी खड़ी करने के लिए उपयोग किया जा रहा है तो वही यात्री प्रतीक्षालय में दुकानदारों द्वारा ठेला लगाकर व्यापार किया जा रहा है।

मजे की बात तो यह है कि सिरमौर अनुविभागीय मुख्यालय होने के कारण यहां से प्रतिदिन जिले के वरिष्ठ अधिकारी और अनुभाग के मुखिया का आना जाना होता है लेकिन प्रशासन व नेता दोनों देखकर भी आंख मूंद लेते हैं इसे हम यह तो इनकी निष्क्रियता कहें या अतिक्रमणकारियों का बोलबाला। बहरहाल लोगों में चर्चा का विषय तो बना है कि प्रशासन अतिक्रमणकारियों के आगे नतमस्तक है ।

क्या कहते है जबाबदार

निकाय सीमा के अंतर्गत समय-समय पर अतिक्रमणकारियों को चिन्हित कर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है । शिकायत मिलने पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई की जावेगी।

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अश्वनी तिवारी, अतिक्रमण प्रभारी नगर परिषद सिरमौर

न्यायालय मार्ग में शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण होने पर माननीय न्यायालय द्वारा निर्णय पारित किया गया । अतिक्रमणकारियों की अपील खारिज की गई । जिस संबंध में नगर परिषद एवं राजस्व विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की नोटिस जारी की गई । लेकिन दुर्भाग्य आज दिनांक तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया । जिससे भविष्य में दुर्घटना कारक स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं ।जिसके लिए स्थानीय प्रशासन जवाबदार होगा ।


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